सारी मुश्किल को धैर्य से समझे बिना
मैं पेंच खोलने के बजाए
उसे बेहतर कसता चला जा रहा था
क्योंकि इस करतब पर मुझे
साफ सुनाई दे रही थी
तमाशबीनों की शबादी और वाह वाह!
प्रश्न 1. कवि की अभिव्यक्ति पर तमाशबीनों की क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: कवि जब भी कोई बात कहने लगता तो बात शब्दजाल में फंसकर और उलझ जाते हैं। भाषा के चक्कर में फंसी बात की धैर्यपूर्वक सुलझाने के बजाए कवि उसे और अधिक कोशिश करने के चक्कर में उलझा देता है।
2. कवि ने भाषा की तुलना किस्से की है और क्यों?
उत्तर: कवि ने भाषा की तुलना पेंच से की गई है क्योंकि पेंच को खोलने की बजाय उसे कोई जबरदस्ती कसता चला जाए।
3. तमाशबीनों से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: मुझे सुनने वाले तथ्य जाने बिना मेरे शब्द चयन पर मुझे शाबाशी देने लगते है तथा शब्दभंडार की प्रशंसा करने लगते है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित काब्यांश को ध्यान से पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखित दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज उड़ सके
दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके
बांस की सबसे पतली कमानी उड़ सके
कि शुरू हो सके सीटियों, किलकारियों और तितलियों को इतनी नाजुक दुनिया।
प्रश्न 1. काव्यांश के भाषा सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: प्रस्तुत काव्याँश कि भाषा बिम्ब प्रधान होते हुए भी सहज, सरल एवम भावग्राही है। कवि ने भावाभिव्यक्ति के लिए साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।
प्रश्न 2. काव्यांश की अलंकार योजना पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर: कवि ने प्रस्तुत काव्याँश में मानवीकरण अलंकार का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है। पतंगे तितलियों की तरह ही विविध रंगों वाली है और वे भरे आसमान में इधर उधर उड़ रही है।
प्रश्न 3. कविता की रचना में शब्द चयन कैसे किया जता है?
उत्तर: कविता की अनजानी दुनिया का सबसे पहला उपकरण हम शब्द चयन की ही कह सकते है।। शब्दो से मेल जोल कविता की पहली शर्त है। शब्दों का चयन कविता के बाह्य रूप को पूर्ण और आकर्षण बनाता है। कवि की कल्पना शब्दों के सार्थक और उचित प्रयोग द्वारा ही साकार होती है। कवि अपने हृदय की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा अनेक प्रकार से योजन करता है और एक प्रभावशाली कविता रच देता है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
1. महामारी फैलने के बाद गांव सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
उत्तर: गांव में फैली बीमारी ने अब महामारी का रूप ले लिया था जिससे पूरे गांव में तहलका मच गया था। सभी के चेहरे में रूदन अलावा कोई अन्य भी चिन्ह यदा कदा ही दृष्टिगोचर होता था। सूर्य निकलने के साथ ही लोग कांपते कहराते घरों से निकलकर अपने आत्मीय जनों तथा मित्रों को समय बलवान होना समझाकर ढाढस बंधाते थे और कहते थे की समय परिवर्तित होता रहता है। गांव में सभी तरफ सिर्फ रोने और लाशे ही दिखाई देते थे।
2. लोगों ने लडको की टोली को मेढक मंडली नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आप को बंदर सेना कहकर क्यों बुलाती थी?
उत्तर: इंदर सेना या मेढक मंडली ये दोनो नाम लड़कों की टोली के लिए प्रचलित है। ये दोनो नाम एक दूसरे से बिलकुल विपरीत है, हो लोग नग्न स्वरूप शरीर उनके उछल कूद , उनके शोर शराबे और उनके कारण गली में होने वाले कीचड़ से चिड़ते थे, वे उन्हें मेढक मंडली कहते थे तथा दूसरी और टोली बनाकर अनावृष्टि दूर करने के लिए द्वार द्वार पर पानी मांगते जाति थी, तब उनका तर्क था की वे इंद्र से पानी मांग रहे है। वे इंद्र को उसी रूप में अर्घ्य देंगे तभी वह प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे। इस कारण टोली अपने आप को इंदर सेना कहकर बुलाते थे।
3. इस कविता के बहाने बताएं की सब घर एक देने के में क्या है?
उतर: सब घर एक कर देने से कवि का आशय है की सर्वथा भेद भाव से परे सोच रखना, सब के साथ मिल जुल कर रहना। बच्चो की सोच बहुत कुछ ऐसी ही होती है, वे खेल आदि के समय प्रायः धर्म, सम्प्रदाय, ऊंच नीच, अमीर गरीब आदि भेद जनित भावों से दूर रहते हैं। कवि का मानना है की कविता भी उक्त भावों से रहित समझ में लोगों को जोड़ने के भावों से लसित होनी चाहिए।
4. बच्चों के कपास की तरह कोमल और पैरों को बैचेन क्यों कहा गया है? पतंग कविता के आधार पर उत्तर लिखिए।
उत्तर: पतंग कविता के आधार पर कवि ने बच्चों को कपास की तरह कोमल इसलिए कहा है, क्योंकि बच्चों में कपास जैसी श्वेत यानी स्वच्छ, कोमल एवम् पवित्र। भावनाएं होती है। यहां कपास कनप्रयोग विशिष्ट है। यह बच्चो के शरीर की दुर्लभ लोच, नरमी, सहनशीलता एवम् कष्ट रोधी शक्ति की और भी संकेत करता है। कवि ने बच्चों के पैरों को बैचेन इसलिए कहा है, क्योंकि ये पैर हर समय घूमने, चलने, दौड़ने एवम् कूदने के लिए व्याकुल रहते है। ये कभी रुकने या थमने का नाम ही नहीं लेते। उनके पैरों में एक बैचेनी, व्याकुलता मौजूद रहती है, जिससे वे सारी पृथ्वी को नाप डालना चाहते है।
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