लाइसोसोम क्या होता है?
लाइसोसोम जंतु कोशिका के अंदर पाए जाना वाला थैलीनुमा रचना होती है । यह कोशिका के अंदर कोशिकीय पदार्थों के पाचन का कार्य करता है । यदि ये छतिग्रस्त हो गए तो इनके इंजाइम द्वारा कोशिका ही नष्ट हो जाती है इसलिए इसे आत्महत्या की थैली भी कहा जाता है । यह जंतुओं के साथ - साथ कुछ हरे शैवाल जैसे - न्यूरोस्पोरा, यीस्ट।
लाइसोसोम में पाचन, जल, अपघटनीय एंजाइम पाए जाते हैं ।
लाइसोसोम के कार्य
1. लाइसोसोम की उपस्थिति के कारण फैगोसायटिक कोशिकाएं यथा श्वेत रक्त कणिका मोनोसाइट्स तथा granulocytes अपना कार्य कर पाती है ।
2. लाइसोसोम बाह्य कोशिकीय पाचन में सहायक होता है । इसमें उपस्थित एंजाइम कोशिका से बाहर आकर भी चारों और के पदार्थों को नष्ट कर सकते हैं और उनका पाचन कर सकते हैं ।
3. ये कोशिकीय पाचन में भी सहायक होते हैं । ये मृत कोशिकाओं का पाचन करते हैं ।
4. लाइसोसोम में अपनी ही कोशिकाओं का पाचन करने की क्षमता पाई जाती है, जिसे ओटोफेजी के नाम से जाना का है ।
5. यह बाह्य कोशिकीय पदार्थों या कणों का एंडोसाइटोसिस क्रिया द्वारा पाचन करता है ।
6. निषेचन के समय यह एक्रोसोम के शीर्ष पर लाइसोसोमल एंजाइम स्त्रावित करता है । ये एंजाइम अंडाणु के चारों ओर उपस्थित पदार्थ को घोलकर स्पर्म को अंडाणु में प्रवेश करने में सहायक होता है।
7. शुक्राणु के लाइसोसोम निषेचन के समय अंड की झिल्ली का पाचन करते हैं । ताकि शुक्राणु अंड में सरलता से प्रवेश कर सकें।
8. ल्यूकोसाइट्स का लाइसोसम जहरीलें पदार्थों अवांछनीय प्रोटीनों, बैक्टीरिया एवं अन्य सूक्ष्म जीवों से रक्षा करती है । इस प्रकार ये प्राकृतिक रूप से शरीर की सुरक्षा करने में मदद करती है ।
9. शरीर की मृत कोशिकाओं को तोड़कर नष्ट करती है । 10. लाइसोसोम थायरॉयड ग्रंथि में पाया जाने वाले थायरोग्लोबिन को जल अपघटित कर सक्रिय थायरोक्सिन में बदल देते हैं ।
11. कोशिका विभाजन क्रिया के लिए भी लाइसोसम का होना आवश्यक है ।
12. लाइसोसम हानिकारक कर्सिनोजन को शरीर से हटाने का कार्य करती है ।
लाइसोसम रोग क्या होता है ?
लाइसोसम रोग : जब सिलिका एस्बेस्टोस व अन्य पदार्थ बाहरी वातावरण से फेफड़े में प्रवेश कर जाते हैं तो लाइसोसम की पारगम्यता बढ़ जाती है व फट जाती है इससे फेफड़ों में जलन, शोथ, उत्तेजना हो जाती है जिसे लाइसोसोम रोग कहा जाता है ।

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