माइकोराइजा क्या होते है? इनके प्रकार एवं कार्यों का वर्ण कीजिए ।
उत्तर : माइकोराइजा मृत जैविकी और मृदा अपरदन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है । ये मृदा से फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटेशियम, पानी आदि पोषक प्रदार्थों को अवशोषण कर पौधों को देते है जिससे पौधे अपनी जरूरत के अनुसार उपयोग करते है । ये माइकोराइजा कृषि फसल के पैदावार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
कवकीय मूल सहजीविता का अच्छा उदाहरण है। यह उच्चवर्गीय पौधों के जड़ों तथा कवक के विशिष्ट प्रकार के सहजीविता के कारण बनता है। ये आकर में सामान्य जड़ से भिन्न होते है । इस प्रकार के जड़ों के सतह पर स्पंजी ऊन की तरह का आवरण पाया जाता है जो कि कवकीय तंतुओं का बना होता है । ऐसे जड़ों में मूल टॉप एवं मूल रोम का अभाव होता है। एक विशिष्ट कवक या कवकों का उच्च वर्गीय पादप की सतह पर चारों तरफ से वृद्धि कर एक आवरण बनाता है तथा पादप के कार्टिकल कोशिकाओं से पोषण प्राप्त करता है।
माइकोराइजा के प्रकार
माइकोराइजा मुख्यतः दो प्रकार के होते है ।
1. एक्टोमाइकोरिजा
2. एंडो माइकोराइजा
1. एक्टोमाइकोरिजा : यह पौधों की जड़ों में पाया जाता है ।
2. एंडो माइकोराइजा : यह मेज़बान की कोशिकाओं के भीतर पाया जाता है ।
कार्य
अच्छी पैदावार के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह किसानों के लिए महत्त्वपूर्ण है । इससे फसल के पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। यह पौधों की जड़ों में पाया जाता है । माइकोराइजा संवहन का भी कार्य करता है जिससे पौधे अपनी आवश्यकता की पूर्ति करते है । जिससे पौधे की ऊर्जा की भी बचत होती है। यह पौधों के जड़ों में लगभग 95% पाया जाता है।
माइकोराइजा का काम फास्फोरस की उपलब्धता को बढ़ाना है। माइकोराइजा के उपयोग से पौधे के जड़ों को मजबूती प्रदान होते है । माइकोराइजा के उपयोग से विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों का अवशोषण हो पाता है। माइकोरिजा मृदा अपरदन को कम करते है ।
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