पर्यावरण प्रदूषण क्या है इसके प्रकार बताइए

पर्यावरण हमारे जीवन का आधार होता है यह हमारे जीवन के साथ हमें कई ऐसी चीजें प्रदान करता है जिसकी कल्पना करना असंभव है । यह मानव जीवन को लाभ पहुंचता है तथा पृथ्वी के तापमान ,आयु, आर्द्रता, वर्षा आदि को संतुलित करता है तथा हैं एक सुंदर वातावरण प्रदान करता है और हमारे जीवन को बेहतर बनने का कार्य करता है । यह मानव जीवन के लिए कल्याणरी होता साबित होता है इसका सही उपयोग करना हमारा मूल कर्तव्य बनता है । यह हमारे लिए बहुत आवश्यक है परंतु मानव ने जैसे जैसे अपनी आव्यक्ताओं की पूर्ति के लिए वन, जल, तथा मिट्टी का उपयोग कर रहा है ठीक वैसे वैसे ही हमारा पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है ।

और साथ ही साथ अनेक प्रकार के रोगों को बढ़ावा मिल रहा है और हर सप्ताह नए रोग की पहचान की जाति है । यह हमारे दुरुपयोग का ही परिणाम है इसे जल्द से जल्द रोकना चाहिए। 

पर्यावरण प्रदूषण : पर्यावरण प्रदूषण न केवल भारत की अपितु पूरे विश्व की समस्या बन गया है । जिस तरह मनुष्य अपनी आवश्यकता अनुसार मशीनरी चीजों का आविष्कार कर धीरे धीरे कर रहा है ठीक उसी प्रकार प्रदूषण भी धीरे धीरे मशीनरी की वजह से बढ़ता जा रहा है । पर्यावरण प्रदूषण इतना बढ़ता जा रहा है की सांस लेने में भी कठिनाई हो रहा है । यदि इसे समय पर रोका नहीं गया तो सजीवों के मृत्यु का कारण पर्यावरण प्रदूषण हो सकता है। पर्यावरण प्रदूषण से न केवल मनुष्य को ही प्रभावित करेंगी अपितु उन समस्त सजिवों जो पृथ्वी पर रहती है उन सभी के लिए भी कठिनाई पैदा हो जाएगी । 

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार 

पर्यावरण प्रदूषण मुख्यतः 5 प्रकार की होती है।  

1. वायु प्रदूषण 

2. मृदा प्रदूषण 

3. जल प्रदूषण 

4. ध्वनि प्रदूषण 

5. रेडियोधर्मी प्रदूषण 

वायु प्रदूषण: वायु प्रदूषण का अर्थ होता है वायु में प्रदूषण अर्थात कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया, मेथेन आदि हानिकर गैस वायु को प्रभावित करती है । जिससे सजीवों को सांस लेने में समस्या होती है । वायु जीवों को प्रमुख जीवन का आधारशिला होता है यदि वायु ही प्रभावित होगा तो जीवन असंभव है ।  सारे जीवधारी सांस लेते है और कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ते है और ये गैस पौधों के लिए लाभदायक होता है क्योंकि इसे ये भोजन बनाते है।  अर्थात् हम कह सकते है की यदि वायु प्रदूषण को नहीं रोका गया तो जीवन का अंत तय है। 

मृदा प्रदूषण: मृदा प्रदूषण का आशय मिट्ठी की प्रदूषण से है । पुराने जमाने में लोग प्राकृतिक रूप से खेती किया करते थे इसमें किसान जैविक विधि द्वारा खेती करते थे जो बिना दवाई और रासायनिक खाद की होती थी । पर जैसे जैसे वैज्ञानिक विधि द्वारा खेती करना आरंभ हुआ है ठीक वैसे वैसे मृदा भी प्रभावित हो रहा है क्योंकि इसमें जैव उर्वरक, विभिन्न प्रकार के खाद और विभिन्न प्रकार के रसायनिक दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है जो मृदा के उर्वरक क्षमता को कम कर रहा है जिससे उपज काम होने लगा है । ये रसायनिक दवाइयां मृदा में तो होती है मृदा से होती हुई जल में अवशोषित हो जाती है और जल भी प्रदूषित हो जाता है । 

जल प्रदूषण : यह भारत की ही नहीं अपितु पूरे विश्व में समस्या बन जा रहा है जल को बहुत ही तीव्र गति से दूषित कर रहे है जिससे न खेती की जा सकती है और न ही पिया जा सकता है । जल मनुष्य, जीव - जंतु, पेड़ पौधे आदि सभी इस पर निर्भर रहते है ।  आजकल नदी, तालाब सब जगह का पानी दूषित हो रहा है कहीं न कहीं इसका कारण खुद मनुष्य ही है । जल का पानी इतना दूषित होता जा रहा है की यदि उसे कोई सजीव पी ले तो उसकी मृत्यु भी हो सकती है । 

ध्वनि प्रदूषण : आजकल मशीनों के निर्माण से बने कारखाने, गाड़ी, हवाई जहाज, विभिन्न प्रकार के फैक्ट्रियों से जो ध्वनि उत्पन्न होता है तथा जो मनुष्यों के लिए हानिकारक हो ध्वनि प्रदूषण कहलाते हैं । ध्वनि प्रदूषण से हमारे कान खराब हो सकते है हमारे में सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है।   


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