आर्थिक दृष्टि से ब्रायोफाइटा काम महत्व वाले पादप होते हैं । ये दूसरे पौधों के लिए ह्यूमरस पैदा करते है। ब्रायोफाइट काफी घने स्वरूप में उगते हैं, जिसके कारण ये पहाड़ों पर भूमि के कटाव को अधिक सामर्थ्य से रोकते हैं । ये जल को अधिक अवशोषण करते है जिसका उपयोग बीज उगाने में किया जाता है ।
ब्रायोफाइटा के प्रमुख लक्षण
1. ये मुख्यत: नमी वाले स्थानों, वृक्षों की छालों तथा भीगी या गीली चटानों में उगते हैं ।
2. ये असंवहनी होते हैं ।
3. ये हरित कवक होते है अर्थात् ये प्रकाश संश्लेषी होते हैं।
4. इनके पादपकाय प्रायः सुकायिक होते है ।
5. लैंगिक जनन अंड युग्मकी होता है ।
6. इनके नर जननांग को पुंधानी कहते है । यह बहुकोशिकीय तथा जैकेट सहित होता है ।
7. इनके मादा जननांग को स्त्रीधानी कहते हैं । यह भी बहुकोशिकीय तथा जैकेट होता है ।
8. इनको निषेचन के लिए जल अति आवश्यक है । बिना जल के ये निषेचन नहीं कर सकते है ।
9. मादा युग्मक को अंडगोल कहते है तथा नर युग्मक को एंथरोजॉयड कहते है ।
10. निषेचित युगमंज द्विगुणित होता है । यह बीजाणु उदभिद को जन्म देता है जिसे स्पोरोगोनियम कहते है ।
11. स्पोरोगोनियम पूर्णतः गैमेटोफाइट पर निर्भर रहता है ।
12. ये पौधे अत्यंत छोटे होते हैं ।
13. उदाहरण के लिए riccia, Epiphyte आदि ।
ब्रायोफाइटा का वर्गीकरण
इसे निम्न तीन भागों में बांटा गया है -
1. Hipaticopsida : इस वर्ग के सदस्यों को लिवरवर्ट्स भी कहा जाता है, क्योंकि इनका थैलस यकृत के आकृति होता है ।
2. Anthocerotopsida : यह दोनो के बीच के लक्षणों का समन्वय प्रदर्शित करता है ।
3. ब्रायोपसीडा : इस वर्ग को सदस्यों को मोसेस कहा जाता है ।
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