परिचय : जीवों का शरीर कोशिकाओं का बन होता है । पहली स्थिति में उसे एककोशिकीय जीव तथा दूसरी स्थिति में बहुकोशिकीय जीव कहा जाता है। एककोशिकीय जीव हो या बहुकोशिकीय जीव, यद्धपि उनमें अकारिकीय एवं आंतरिकीय इतनी विविधता तो पाई ही जाती है, की उनकी वैयक्तिक पहचान सुनिश्चित हो सके । इनकी विविधता इतनी स्पष्ट होती है की एक ही माता - पिता के दोनों संतानों के बीच विभेदन किया जा सकता है। इसे भी पढ़े
यही लक्षण सजीवों को जीवन की विशिष्टता प्रदान करती है। ये कोशिकाएं अत्यंत ही सूक्ष्म होती है जिन्हे देखने के लिए माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। ये इतने बारीक होते है की इन्हें नग्न आखों से नहीं देखा जा सकता है । इन्ही कोशिकाओं से मिलकर हमारा शरीर बना होता है । उदाहरण के लिए घर को बनाने के लिए ईंट की आवश्यकता होती है बहुत सारे ईंटो से मिलकर हमारा घर बनाता है ठीक उसी प्रकार बहुत सारे कोशिकाओं से मिलकर हमारा शरीर बना होता है । ईंट दीवार का आधार होता है उसी तरह से कोशिका भी हमारा आधार है । कोशिका के बिना शरीर का बनना संभव नहीं है ।
कोशिका के अध्ययन करने वाली जीव विज्ञान की इस शाखा को कोशिका जीव विज्ञान कहते है तथा इसे ही कोशिका विज्ञान भी कहते है। कोशिका विज्ञान के जनक के रूप में श्वान नामक वैज्ञानिक को सूचित किया जाता है, क्योंकि इन्होंने ही सर्वप्रथम कोशिका की कार्यिकी एवं आकारिकी का अध्ययन किया था।
किसी भी तरह का जीव क्यों न हो उसकी आधारभूत कोशिकीय सरंचना समान ही होता है, लेकिन इतनी बड़ी समानता के बाद भी जीवों में भरपूर विविधता की उपस्थित का मुख्य कारण इनमें पाई जाने वाली विशेष प्रकार की आण्विक, उपकोशिकीय, कोशिकीय, ऊतकीय, आंगिक स्तर की विशिष्ट व्यवस्थाएं हैं ।
परिभाषा: कोशिका जंतुओं तथा पौधों के शरीर की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई होती है। इसके क्रियात्मकता की पहचान उसके प्रोटोप्लाज्म में चल रहे रसायनिक अभिक्रियाओं से होती है ।
कोशिका की खोज इतिहास:
जैकेरियास जेनसेन द्वारा बनाए गए प्रथम सूक्ष्मदर्शी को परिष्कृत कर रॉबर्ट हुक ने सन् 1665 में कॉर्क के स्लाइड को काटकर अपने द्वारा विकसित किए गए सूक्ष्मदर्शी के दृश्य लेंस से देखा तो उन्हें। अनेक खाली स्थल दिखे जो अपनी - अपनी सीमा रेखा रेखा भित्ति से घिरे थे। रॉबर्ट हुक ने कॉर्क कोशिकाओं को देखा था । इन कोशिकाओं को देखने वाले प्रथम वैज्ञानिक थे । 10 जून, सन् 1675 को एंटोनी von ल्यूवेन्होक नामक वैज्ञानिक द्वारा जीवाणुओं तथा प्रोटोजोआ को लगभग दो सौ गुणा विशालित करके देखा । ये ऐसे प्रथम वैज्ञानिक थे जिन्होंने सजीव कोशिका को देखा था । ल्यूवेन्हाइक ने जीवित कोशिका को अनिमालकुल कहा । ग्रीव ने सन् 1682 अनेक पौधे की आंतरिकी का अध्ययन किया तथा कोशिका के अवधारणा को प्रस्तुत किया तथा इसी वैज्ञानिक ने कोशिका को जीव को संरचनात्मक इकाई कहा ।
इस तरह से धीरे धीरे कोशिका के बारे में जानकारी प्राप्त करते गए और सन् 1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने केन्द्रक खोजा जिसे केंद्रक नाम दिया । फ्रांसीसी वैज्ञानिक डूजार्दीन ने सन् 1835 में कोशिका के अंदर अर्धद्रव्ययी पदार्थ की उपस्थिति का पता लगाया । तथा इसे सरकोड नाम दिया । पुरकिंजे ने सन् 1840 में इसे प्रोटोप्लाज्म नाम दिया तथा इसी को हक्सले ने प्रोटोप्लाज्म को ' जीवन का भौतिक आधार ' माना ।
क्लाउड एवं पैलेड में कोशिका की परसंरचना का अध्ययन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से किया तथा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए गए ।
इस तरह से कोशिका का पता चल पाया फिर कोशिका का पूर्ण रूप से खोज की गई और आज हम उसके बारे में पढ़ रहे है ।
आशा करता हुआ आपको यह पसंद आया होगा ।
धन्यवाद!
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